आज ओयो केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह चीन, अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया सहित कई देशों में अपनी सेवाएँ दे रहा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी होटल श्रृंखलाओं में से एक बन चुकी है।
निष्कर्षतः, ओयो (On Your Own) ने न केवल रहने के नजरिए को बदला है, बल्कि इसने यह भी साबित किया है कि एक छोटे से विचार और कड़े परिश्रम से वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। रितेश अग्रवाल की यह सोच आज लाखों यात्रियों के लिए मददगार साबित हो रही है। ओयो भारतीय स्टार्टअप जगत का एक चमकता सितारा है जो 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को हकीकत में बदल रहा है। बल्कि यह चीन
ओयो रूम्स की शुरुआत साल 2013 में एक युवा भारतीय उद्यमी रितेश अग्रवाल द्वारा की गई थी। रितेश ने अपनी यात्राओं के दौरान महसूस किया कि भारत में बजट होटलों में गुणवत्ता और मानक सेवाओं की भारी कमी है। उन्होंने इस समस्या को सुधारने के लिए 'ओरावेल स्टेज' (Oravel Stays) नाम से एक वेबसाइट शुरू की, जिसे बाद में 'OYO Rooms' में बदल दिया गया। ओयो का विचार यह था कि यात्रियों को कम कीमत में साफ-सुथरे कमरे, वाई-फाई और अच्छी सेवा मिल सके। बल्कि यह चीन
ओयो यह सुनिश्चित करता है कि उसके हर होटल में कुछ बुनियादी सुविधाएँ जैसे सफेद चादरें, साफ बाथरूम और मुफ्त इंटरनेट उपलब्ध हों। बल्कि यह चीन